एक हसीन रात

मैं रेलगाड़ी से इंदौर से मुंबई जा रहा था। मेरे सामने वाली सीट पर एक सुंदर महिला बैठी थी। उसने नीली साड़ी पहनी हुई थी। वो पतली दुबली थी मगर उसके दूध बड़े बड़े थे। ऐसा लगता था मानो अभी ब्लाउज़ फाड़ कर बाहर आने को बेताब हैं। उसका रंग भी बिल्कुल दूध की तरह सफ़ेद था। उसकी उमर कोई २८ साल की होगी । मैंने ध्यान दिया कि वो मुझे बहुत देर से देख रही है तो मैं भी उसकी तरफ़ देख कर थोड़ा मुस्करा दिया।

फिर वो मुझसे अपनी टिकट दिखाते हुए पूछने लगी कि ज़रा देखो मेरा रिज़र्वेशन है या नहीं?

मैंने देखा उनका वेटिंग टिकट था। मैने कहा- कोई बात नहीं आप मेरे सीट में सो जाना।

मैंने उसका नाम पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम रूपा है। रूपा की खूबसूरती देख कर मेरे मुंह और लंड दोनों ही जगह से पानी निकल रहा था। मैं मन ही मन उसे चोदने की योजना बनाने लगा।

वो सरदी की रात थी इसलिये सभी लोग कम्बल ढक कर सो रहे थे। रात को हम खाना खाने के बाद मैंने रूपा से कहा- आप सो जाओ, मैं बैठता हूँ।

उसने कहा- नहीं तुम भी कम्बल ओढ़ कर सो जाओ। और फिर वो ट्रेन की उस छोटी सी सीट पर इस तरह से लेट गई कि उसकी गांड मेरी तरफ़ थी और चेहरा दूसरी तरफ़। मैं तो जग रहा था। फिर मैं दूसरी सीट पर उसके सर की तरफ़ पैर को रख कर लेट गया और मैं उसकी गांड की तरफ़ मुंह घुमा कर सो गया। अब लंड बिल्कुल उसकी गांड की दरार की तरफ था। रूपा के गोरे गोरे पैर भी बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने थे। मेरे लंड को समझाना अब मुश्किल हो रहा था।

मैंने देखा कि वो सो गई है और हमारी बोगी में कोई जाग नहीं रहा था। मैंने उपना लंड निकाला और हिलाने लगा ! अब बस मैं उसको छोड़ने के बारे में ही सोच रहा था। पता नहीं वो कब जाग गई और मुझको ये सब करते हुए चुपके से देखने लगी। उसका हाथ उसकी चूत पर था। वो धीरे से मेरे पास आई और मेरे लंड को छूने लगी मुझको भी मज़े आने लगे।

थोड़ी देर बाद उसने मेरे पैरों को ज़ोर से पकड़ का अपने बूब्स से रगड़ना शुरु कर दिया। फिर मैं भी उसके पैरों को सहलाते हुए जांघ तक जा पहुंचा और जब मैंने उसकी चूत पर हाथ रखा तो ऐसा लगा कि मेरा हाथ जल गया। उसकी चूत भट्टी की तरह गरम हो रही थी और गरम गरम चूत बिल्कुल गीली हो रही थी। मैने उसकी चूत में अपनी उंगलियां डालनी शुरु कर दी, उसकी चूत पर छोटे छोटे बाल थे जिनको मैं अपनी उंगलियों से सहला रहा था।

फिर धीरे धीरे कम्बल के अन्दर ही मैं अपना मुंह उसकी चूत तक लेकर गया और उसकी चूत को पीने की कोशिश करने लगा। उसने अपने एक पैर को उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया। अब उसकी बुर बिल्कुल मेरे मुंह में थी मैं अपनी जीभ को उसके बुर के चारों तरफ़ घुमाना शुरु कर दिया। उसने भी अपनी कमर धीरे धीरे हिलाना शुरु कर दी। मैने भी अपने पैर को उठा कर अपना लंड उसकी तरफ़ बढ़ा दिया। वो बड़े प्यार से लंड को चूसने लगी।

हम अब बिल्कुल ६९ की पोजिशन में थे लेकिन ऊपर नीचे नहीं थे बल्कि साइड बाइ साइड थे और हम जो भी कर रहे थे धीरे धीरे कर रहे थे क्योंकि ट्रेन में किसी को पता न चले। वो अब कुछ ज्यादा ही ज़ोर से अपने कमर को उठा का अपने बुर को मेरे मुंह में रगड़वा रही थी। अचानक उसने मेरे सर को अपने हाथ से अपनी बुर में ज़ोर से दबा दिया और कमर को मेरे मुंह में दबा दिया और ढीली पड़ गई। मैंने उसकी बुर के रस को धीरे धीरे अपने मुंह से चाट चाट कर साफ़ किया। वो अब भी मेरे लंड को चूस रही थी। मैं भी अब जोर जोर से अपने लंड को उसके मुंह में घुसा रहा था। मेरे लंड का पानी भी अब बाहर निकलने वाला था, मैंने ज़ोर से उसके बुर में अपना मुंह घुसा दिया और मेरे लंड से पानी निकलना शुरु हुआ तो ८-१० झटके तक निकलता ही रहा। वो मेरे लंड के पानी को पूरा अपनी मुंह में लेकर पी गई।

थोड़ी देर के बाद मैं उठा और टॉयलेट गया। मैंने अपनी पैंट उतार दी फिर अपनी चड्ढी भी उतार दी। अपने लंड को अच्छी तरह से साफ़ किया और पैंट पहन ली। वापस आकर मैने अपनी चड्ढी बैग में डाल दी। फिर वो भी टॉयलेट जाकर आई। और मेरी तरफ़ मुंह करके सो गयी और कम्बल ढक लिया। अब उसके बूब्स मेरी छाती से लग रहे थे। मैने उसके ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। वो ब्रा नहीं पहने थी। ब्रा को शायद टॉयलेट में ही उतार कर आई थी। मैं उसके गोल गोल स्तनों को अपने हाथ से दबाने लगा और उसके निप्पल को मुंह में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा। उसने अपने एक हाथ से अपनी साड़ी को उठा कर कमर के ऊपर कर लिया। अब उसकी कमर के नीचे कुछ भी नहीं था मेरा हाथ उसके मक्खन जैसी जांघों को तो कभी उसके बुर को प्यार से सहला रहा था और रूपा अपने हाथों से मेरे लंड को सहला रही थी। ऐसा काफ़ी देर तक चलता रहा।

मेरा लंड एक बार फिर से उसकी बुर की गहराई को नापने के लिये मचलने लगा था। मैने धीरे से रूपा से पलट कर सोने को कहा। रूपा धीरे से पलट गई। अब उसकी नंगी गांड की दरार मेरे लंड से चिपकी हुई थी। मैने धीरे से अपने लंड को हाथ से पकड़ कर पीछे से उसकी गांड के छेद में रखा और एक हल्का सा धक्का मारा। मेरा लंड उसकी गांड में आधा घुस गया लेकिन वो दर्द से कराह उठी। लेकिन वो चीखी नहीं। वो जानती थी कि ट्रेन में सब सो रहे लोगों को शक न हो जाये।

मैंने काफी देर तक उसकी गांड मारी। फिर मैंने उसको अपनी तरफ मुँह करने को कहा और उसकी चूत में अपना लंड घुसा दिया और उसके वक्ष को चूसने लगा।

अब मेरे लंड से पिचकारी निकलने वाली थी। मैंने अपना लंड रूपा की चूत से निकाला और उसके मुँह में घुसा दिया। वो मेरा सारा रस पी गई। अब हम दोनों काफी थक चुके थे। हम लोगों का स्टेशन आने में कुछ वक्त था। हम लोग थोड़ी देर सो गए।

फिर सुबह मेरा स्टेशन आ गया। और मैं उतर गया। उसे आगे जाना था तो वो चली गई और जाते जाते अपना फोन नम्बर भी दे गई।

आज भी हम दोनों की फ़ोन पर रोज बात होती है।

1 thought on “एक हसीन रात”

Leave a Comment

YumStories.com